मतदाता सूची में नाम है या नहीं? 17 और 24 अक्टूबर को जरूर जाँचें
लोकतंत्र की असली ताकत उसके नागरिकों की भागीदारी में है, और इस भागीदारी का पहला कदम है मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो वह अपने सबसे बड़े संवैधानिक अधिकार का उपयोग नहीं कर पाएगा। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक या युवा मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
विशेष शिविर की तिथियाँ और समय
अभियान के अंतर्गत 17 अक्टूबर (शनिवार) और 24 अक्टूबर (शनिवार) को प्रदेश के प्रत्येक मतदान केंद्र (बूथ) पर विशेष शिविर लगेगा। इन दोनों दिनों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अपने बूथ पर मौजूद रहेंगे। उनके पास नवीनतम मतदाता सूची और पर्याप्त संख्या में खाली फॉर्म 6 होंगे।
आपको क्या करना है?
- जिनका नाम सूची में है: शिविर में जाकर अपना नाम जाँच लें। नाम मिल जाए तो आपको कुछ और करने की जरूरत नहीं है।
- जिनका नाम सूची में नहीं है: आपको फॉर्म 6 भरना होगा। यह नया मतदाता बनने का आवेदन पत्र है।
फॉर्म 6 के साथ ये चीजें जरूरी हैं
- नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो।
- जन्म तिथि और वर्तमान पते का प्रमाण: इन्हें दर्शाने वाले दस्तावेजों की स्वयं सत्यापित (self-attested) प्रति।
- परिवार के सदस्य का EPIC नंबर: जिस पते पर आप वोट बनवाना चाहते हैं, वहाँ आपके साथ रहने वाले किसी परिवारजन का नाम पहले से मतदाता सूची में हो, तो उनके मतदाता पहचान पत्र (EPIC card) का नंबर फॉर्म में लिखना होगा।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधा
यदि किसी व्यक्ति की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से अधिक है, तो वह फॉर्म 6 में दिव्यांगता का प्रतिशत भरे और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र की प्रति भी साथ लगाए। इससे चुनाव के समय उनके घर जाकर मतदान कराने की व्यवस्था की जा सकेगी।
प्रदेशवासियों से अपील
उत्तर प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील है कि इन दोनों शनिवारों को अपने बूथ पर जरूर जाएँ। वहाँ अपना और अपने परिवार के सभी सदस्यों का नाम मतदाता सूची में देख लें। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं मिलता, तो उसी दिन फॉर्म 6 भरकर जमा करें। घर के युवाओं, पहली बार वोट देने योग्य बच्चों और नए पते पर आए सदस्यों की जाँच विशेष रूप से करें।
निष्कर्ष
मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। जब हर पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होगा, तभी चुनाव में सबकी आवाज सुनी जाएगी। इसलिए आज ही तय कर लें कि 17 या 24 अक्टूबर को आप अपने बूथ पर जाएँगे। आपका एक छोटा-सा कदम लोकतंत्र को मजबूत करेगा।


